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पटना अपहरण कांड में बड़ी सफलता, 70 लाख फिरौती केस में समस्तीपुर से आरोपी गिरफ्तार

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पटना डॉक्टर अपहरण और 70 लाख रुपये फिरौती मामले में पुलिस ने समस्तीपुर के दलसिंहसराय से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच जारी है।

समस्तीपुर/आलम की खबर: राजधानी पटना में डॉक्टर के अपहरण और 70 लाख रुपये की फिरौती मांगने के सनसनीखेज मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में लगातार चल रही जांच के दौरान पुलिस ने समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय थाना क्षेत्र से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले में शामिल नेटवर्क को लेकर पुलिस की जांच और अधिक तेज हो गई है।

यह मामला पटना के जानीपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां फरवरी 2026 में आर्यभट्ट इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल के संचालक डॉक्टर का कथित रूप से अपहरण कर लिया गया था। इस घटना ने उस समय पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया था और पुलिस प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया था। अपहरण के बाद परिजनों को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए 70 लाख रुपये की फिरौती की मांग की गई थी, जिससे मामला और गंभीर हो गया था।

मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद पटना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की थी। पुलिस ने तकनीकी जांच और सर्विलांस के आधार पर मात्र 24 घंटे के भीतर अपहृत डॉक्टर को समस्तीपुर जिले के वारिसनगर थाना क्षेत्र के मकसूदपुर गांव से सकुशल बरामद कर लिया था। यह कार्रवाई पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी गई थी, क्योंकि इतने कम समय में पीड़ित को सुरक्षित वापस लाना चुनौतीपूर्ण था।

गिरफ्तार किए गए नए आरोपी की पहचान दलसिंहसराय थाना क्षेत्र के मधेपुर निवासी लाल बाबू सिंह के पुत्र पंकज कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारी गुप्त सूचना के आधार पर की गई है। स्थानीय पुलिस की मदद से की गई इस छापेमारी में आरोपी को उसके ठिकाने से दबोचा गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे अपहरण और फिरौती गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जा सके। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस घटना में कई लोग शामिल हो सकते हैं और यह एक संगठित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

इस पूरे मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान रविंद्र प्रसाद, राकेश कुमार और मनीष कुमार जैसे आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब एक और गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं।

पुलिस का मानना है कि इस तरह की घटनाओं में डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, जिसमें व्हाट्सएप कॉल और ऑनलाइन संचार के जरिए फिरौती की मांग की जाती है। इस मामले में भी यही तरीका अपनाया गया था, जिससे पुलिस को तकनीकी जांच का सहारा लेना पड़ा।

जांच अधिकारियों के अनुसार, यह मामला सिर्फ अपहरण तक सीमित नहीं था बल्कि इसके पीछे आर्थिक लाभ का एक संगठित प्रयास भी हो सकता है। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घटना में कितने लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे।

स्थानीय स्तर पर इस गिरफ्तारी के बाद लोगों में राहत की भावना देखी जा रही है, लेकिन साथ ही इस तरह की घटनाओं को लेकर चिंता भी बढ़ी है। लगातार सामने आ रहे अपहरण और फिरौती मामलों ने कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी की भूमिका की गहन जांच की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

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